punjab election result 2025:- चंडीगढ़, 18 दिसंबर 2025: पंजाब के ज़िला परिषद और पंचायत समिति चुनावों के नतीजों ने राज्य की राजनीति का नया समीकरण सामने रख दिया है। इन चुनावों को 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों का ‘अर्धवार्षिक परीक्षा’ माना जा रहा था और भगवंत मन्न सरकार के दो साल के कामकाज का रिपोर्ट कार्ड भी। नतीजे बताते हैं कि ग्रामीण पंजाब ने आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार को अपना वोट दिया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, राज्य में कुल 347 ज़िला परिषद और 2,838 पंचायत समिति ज़ोन के लिए मतदान हुआ था, जिनमें से बुधवार शाम तक जारी परिणामों में AAP ने 927 से अधिक ज़ोन में जीत दर्ज की है और कई अन्य में उसकी बढ़त बनी हुई है।
ये परिणाम बताते हैं कि 2022 के विधानसभा चुनाव में पूर्ण बहुमत से सत्ता में आई भगवंत मन्न सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में भी अपनी पकड़ मजबूत की है। पार्टी के पंजाब प्रदेश अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने दावा किया है कि अब तक घोषित 85% परिणाम AAP के पक्ष में हैं। हालांकि, कांग्रेस ने कुछ जिलों में अच्छी पकड़ बनाई है, और शिरोमणि अकाली दल (SAD) व भाजपा का प्रदर्शन सिमटा हुआ नजर आया है।
punjab election result 2025
14 दिसंबर को हुए मतदान के बाद बुधवार 18 दिसंबर को मतगणना हुई। चुनाव आयोग द्वारा जारी आंकड़ों और दलों के दावों को मिलाकर राज्यव्यापी तस्वीर कुछ इस प्रकार उभर रही है:
| स्तर / संस्था | कुल ज़ोन | AAP की जीत | कांग्रेस की जीत | SAD की जीत | भाजपा की जीत | निर्दलीय |
|---|---|---|---|---|---|---|
| ज़िला परिषद | 347 (22 ज़िले) | 60 (71 में से घोषित) | 7 | 1 | 1 | 2 |
| पंचायत समिति | 2,838 (153 ब्लॉक) | 867 (1,875 में से घोषित) | 216 | 129 | 20 | 63 |
अमन अरोड़ा के मुताबिक, ज़िला परिषदों की 113 ज़ोन में और पंचायत समितियों की 257 ज़ोन में AAP की अगुवाई बनी हुई है। उन्होंने कहा कि यह “चुनाव में एकतरफा माहौल” दर्शाता है और “गांवों के लोगों ने AAP की अच्छी सरकार को अपनी मुहर लगा दी है।”
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इन चुनावों में कुल 48% मतदान दर्ज किया गया, जिसमें 9,000 से अधिक उम्मीदवार मैदान में थे। सभी प्रमुख दलों- AAP, कांग्रेस, SAD और भाजपा ने अपने-अपने चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़ा था।
punjab election result 2025: दोआबा में दोहराई 2022 की तस्वीर, नवांशहर में हैरतअंगेज नतीजे
राज्य के विभिन्न क्षेत्रों- दोआबा, माझा और मालवा में मतदाताओं के रुझान में कुछ समानताएं और कुछ हैरान करने वाले अंतर देखने को मिले हैं। सबसे दिलचस्प तस्वीर दोआबा क्षेत्र के जिलों की रही है, जहां 2022 के विधानसभा चुनाव के ट्रेंड काफी हद तक दोहराए गए हैं।
होशियारपुर जिले में AAP ने जबरदस्त सफलता हासिल की है। यहां की 23 ज़िला परिषद सीटों में से 20 पर AAP के उम्मीदवार जीते हैं, जबकि केवल 3 सीटें कांग्रेस के खाते में गई हैं। पंचायत समिति की 208 सीटों में से 17 सीटें तो AAP को निर्विरोध मिल गई थीं। शेष 191 सीटों के लिए हुए मतदान में AAP ने 80 सीटें जीतकर अपना दबदबा कायम रखा है।
हालांकि, कपूरथला जिले में कांग्रेस ने अच्छी वापसी की है। यहां 10 ज़िला परिषद ज़ोन में से कांग्रेस ने 4 जीते, जबकि AAP को 3, SAD को 1 और निर्दलीय उम्मीदवारों को 2 सीटें मिली हैं। पंचायत समिति की 88 सीटों में AAP ने 22, कांग्रेस ने 12, SAD ने 7 और निर्दलीयों ने 17 सीटों पर जीत हासिल की है। इससे कपूरथला के कांग्रेस विधायक राणा गुरजीत सिंह और उनके बेटे तथा सुल्तानपुर लोधी के निर्दलीय विधायक राणा इंदर प्रताप सिंह के मनोबल को बढ़ावा मिला है।
जालंधर जिले में AAP और कांग्रेस के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला है। पंचायत समिति की 188 सीटों में से 129 के नतीजे घोषित हो चुके हैं, जिनमें AAP ने 45 और कांग्रेस ने 43 सीटें जीती हैं। 21 ज़िला परिषद सीटों में AAP को 9 और कांग्रेस को 8 सीटें मिली हैं। दिलचस्प बात यह है कि इस जिले में भाजपा एक भी सीट नहीं जीत सकी है।
सबसे हैरान करने वाले नतीजे नवांशहर जिले से आए हैं, जहां विधानसभा में कांग्रेस का कोई विधायक नहीं है। यहां ज़िला परिषद की सीटों पर कांग्रेस ने AAP को पछाड़ते हुए 6 सीटें जीतीं, जबकि AAP को 4 सीटें मिलीं। पंचायत समिति में भी कांग्रेस (33 सीटें) ने AAP (29 सीटें) से बेहतर प्रदर्शन किया है। यह नतीजा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह AAP के लिए एक चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं: विजय का दावा और धांधली के आरोप
चुनाव परिणामों पर सभी प्रमुख दलों ने अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं:
AAP की प्रतिक्रिया: अमन अरोड़ा ने कहा, “यह परिणाम पंजाब सरकार की नीतियों के प्रति लोगों के झुकाव को दर्शाता है। ग्रामीण क्षेत्रों ने हमारे विकास कार्यों और सुशासन को पहचाना है।” उन्होंने इसे 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए एक सकारात्मक संकेत बताया।
विरोधी दलों की प्रतिक्रिया: कांग्रेस और SAD ने AAP पर “मतदान के दौरान खुलेआम चुनावी गड़बड़ियां” करने का आरोप लगाया है। उन्होंने भगवंत मन्न सरकार पर आरोप लगाया कि उसने सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल कर विपक्षी उम्मीदवारों के नामांकन पत्र दाखिल करने से रोका और उन्हें रद्द करवाया।
मतगणना केंद्रों पर विवाद: पटियाला में SAD कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि उन्हें पटियाला-नाभा रोड स्थित एक मतगणना केंद्र में प्रवेश नहीं दिया गया। SAD नेता जसपाल सिंह ने दावा किया कि पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह के बेटे राहुल सैनी मतगणना केंद्र के अंदर थे, जबकि विपक्ष के प्रतिनिधियों को अंदर जाने से रोका गया। इसी तरह, शम्भू ब्लॉक की मतगणना के दौरान घनौर के यूनिवर्सिटी कॉलेज में पूर्व विधायक मदन लाल जलालपुर ने आरोप लगाया कि वर्तमान विधायक गुरलाल सिंह घनौर बिना अनुमति के मतगणना केंद्र में घुस गए।
भविष्य के लिए विधानसभा चुनाव की ओर इशारा
इन निकाय चुनावों के नतीजों के कई महत्वपूर्ण राजनीतिक निहितार्थ हैं:
- AAP की ग्रामीण पकड़ मजबूत: विधानसभा चुनावों में शहरी क्षेत्रों में मजबूत रहने वाली AAP ने इन चुनावों में साबित किया है कि उसकी पहुंच अब ग्रामीण पंजाब तक भी है।
- कांग्रेस के लिए राहत के संकेत: कपूरथला और नवांशहर जैसे जिलों में बेहतर प्रदर्शन से कांग्रेस को मनोबल मिला है। यह दल के लिए एक राहत है, खासकर उस समय जब वह राज्य में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।
- SAD और भाजपा के लिए चुनौती: इन चुनावों में SAD और भाजपा का प्रदर्शन निराशाजनक रहा है। दोनों दलों को अब अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करने की जरूरत है।
- 2027 का संकेत: अधिकांश राजनीतिक विश्लेषक इन नतीजों को 2027 के विधानसभा चुनाव का अग्रिम संकेत मान रहे हैं। अगर AAP इसी तरह अपनी ग्रामीण लोकप्रियता बनाए रखती है, तो 2027 में उसके फिर से सत्ता में आने की संभावना प्रबल होगी।
ग्रामीण पंजाब ने दी सुशासन को मंजूरी
पंजाब के ज़िला परिषद और पंचायत समिति चुनाव 2025 के नतीजे स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि ग्रामीण पंजाब ने भगवंत मन्न के नेतृत्व वाली AAP सरकार के दो साल के कार्यकाल को मंजूरी दी है। हालांकि विपक्ष द्वारा कुछ अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं, लेकिन चुनावी नतीजों ने AAP को स्पष्ट बढ़त दी है। राज्य में अब एक नए राजनीतिक समीकरण के उभरने के संकेत मिल रहे हैं, जहां AAP और कांग्रेस प्रमुख प्रतिद्वंद्वी के रूप में उभर रहे हैं, जबकि SAD और भाजपा किनारे होती नजर आ रही हैं। ये नतीजे आने वाले समय में पंजाब की राजनीति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
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