Anurag Dwivedi:- गाँव की उन पगडंडियों से लेकर दुबई के शाही होटलों तक का सफर तय करने वाले अनुराग द्विवेदी आज देश के सबसे चर्चित युवाओं में से एक हैं। 26 वर्षीय यह यूट्यूब स्टार अपने करीब 70 लाख सब्सक्राइबर्स के साथ एक बड़े डिजिटल साम्राज्य का मालिक है। लेकिन दिसंबर 2025 में ED की बड़ी छापेमारी ने उनकी तेजी से बढ़ती संपत्ति और शानो-शौकत पर गंभीर सवाल उठा दिए हैं।
उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के खजूर गाँव से निकलकर दुबई में शाही शादी तक पहुँचने वाले इस युवा की कहानी कई मायनों में अनोखी है। क्रिकेट के प्रति उनके जुनून ने उन्हें फैंटेसी लीग का ‘एक्सपर्ट’ बना दिया, और सोशल मीडिया ने उन्हें एक ब्रांड। लेकिन क्या यह सब कानूनी था? यह सवाल आज हर किसी के जहन में है।
गाँव से दिल्ली तक का सफर
अनुराग द्विवेदी का जन्म 1999 में उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के नवाबगंज तहसील में हुआ। उनके पिता लक्ष्मीनाथ द्विवेदी नवाबगंज में एक मेडिकल स्टोर चलाते हैं और गाँव के प्रधान भी रह चुके हैं। पारिवारिक पृष्ठभूमि साधारण थी, और अनुराग की शुरुआती शिक्षा भी स्थानीय स्कूल में हुई।
पढ़ाई से ज्यादा Anurag Dwivedi का मन क्रिकेट में लगता था। इसी जुनून ने उन्हें फैंटेसी क्रिकेट की दुनिया में ला खड़ा किया। 2016 के T-20 वर्ल्ड कप के दौरान भारत-पाकिस्तान मैच के लिए उन्होंने पहली बार ड्रीम-11 पर टीम बनाई, हालाँकि उस समय उन्हें कोई फायदा नहीं हुआ।
दिलचस्प है कि पहली फैंटेसी टीम बनाने के लिए अनुराग के पास खुद का फोन तक नहीं था। कहा जाता है कि उन्होंने अपने चाचा की सोने की चेन चुराकर बेची और उस पैसे से जे-7 प्राइम फोन खरीदा। यही वह फोन था जिससे उन्होंने अपने सफर की शुरुआत की।
2017-18 में क्रिकेट सट्टे में लाखों रुपये गंवाने के बाद पिता की डाँट से तंग आकर अनुराग अपने दोस्त के साथ दिल्ली चले गए। यह फैसला उनकी जिंदगी का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ।
Anurag Dwivedi: यूट्यूब की ओर
दिल्ली पहुँचने के बाद अनुराग ने फैंटेसी क्रिकेट को गंभीरता से लेना शुरू किया। 2017 में IPL के आखिरी 6 मैचों में लगभग 300 रुपये लगाकर टीम बनाई, और दावा है कि इससे उन्हें 3 लाख रुपये का मुनाफा हुआ। इस सफलता ने उनका आत्मविश्वास बढ़ाया।
यूट्यूब पर उनकी शुरुआत 2016 में हुई, लेकिन पहला चैनल जल्द ही सस्पेंड हो गया। हार न मानते हुए उन्होंने 2017 में दूसरा चैनल बनाया, जो कॉपीराइट इश्यू के चलते फिर बंद हुआ। 2018 में तीसरे चैनल ‘Anurag Dwivedi’ के साथ उन्हें सफलता मिलनी शुरू हुई।
अनुराग के कॉन्टेंट की खासियत थी क्रिकेट मैच प्रिडिक्शन, फैंटेसी टीम टिप्स और ड्रीम11 जैसे प्लेटफॉर्म के लिए सलाह। वे खुद को ‘फैंटेसी क्रिकेट का चेहरा‘ बताते थे। धीरे-धीरे उनके चैनल की लोकप्रियता बढ़ने लगी।
2024 तक अनुराग यूट्यूब पर एक बड़ा नाम बन चुके थे। 7 जनवरी 2024 को उन्होंने लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में ‘तू कर लेगा’ नाम से एक बड़ा मीट-अप आयोजित किया, जहाँ हजारों प्रशंसक उनसे मिलने पहुँचे। इसी साल वे एंटरटेनर्स क्रिकेट लीग (ECL) में लखनऊ लायंस टीम के सदस्य भी बने।
Anurag Dwivedi
विवादों में उलझता सितारा
Anurag Dwivedi की सफलता पर विवादों का साया 2024 के अंत में पड़ना शुरू हुआ। दिसंबर 2024 में दावा किया गया कि लॉरेंस बिश्नोई गैंग के रोहित गोदारा ने अनुराग को फोन कर एक करोड़ रुपये की रंगदारी और जान से मारने की धमकी दी। अनुराग ने सुरक्षा की गुहार लगाई, हालाँकि बाद में उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट हटा ली।
इस घटना ने अनुराग को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया। लेकिन इससे भी बड़ा विवाद नवंबर 2025 में तब खड़ा हुआ जब उन्होंने 22 नवंबर 2025 को दुबई में एक क्रूज पर भव्य शादी की। इस शादी में उन्होंने गाँव के करीब 100 रिश्तेदारों और दोस्तों को प्लेन से दुबई बुलाया और सारा खर्च स्वयं उठाया। अफवाहें उड़ीं कि उन्होंने दुबई में प्रॉपर्टी भी खरीदी है।
ED की कार्रवाई: करोड़ों की संपत्ति पर शिकंजा
Anurag Dwivedi की तेजी से बढ़ती संपत्ति और विलासितापूर्ण जीवनशैली पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की नजर थी। 17-18 दिसंबर 2025 को ED ने लखनऊ, उन्नाव और दिल्ली के 10 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की।
इस कार्रवाई में क्या बरामद हुआ:
- 4 लग्जरी कारें जिनमें लैंबॉर्गिनी उरुस (4-6 करोड़), मर्सिडीज, बीएमडब्ल्यू Z4, और फोर्ड एंडेवर शामिल
- करीब 3 करोड़ रुपये जमा बैंक खाते फ्रीज
- 20 लाख रुपये नकद
- कई डिजिटल डिवाइस और दस्तावेज
ED के अनुसार, अनुराग पर अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी ऐप्स (जैसे स्काई एक्सचेंज) को प्रमोट करने और मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है। आरोप है कि वे अवैध बेटिंग ऐप्स के लिए प्रमोशनल वीडियो बनाते थे और हवाला चैनलों के जरिए फर्जी खातों से पैसा प्राप्त करते थे।
जांच में पता चला कि अनुराग की कंपनियों और परिवार के सदस्यों के बैंक खातों में बिना किसी उचित कारोबारी वजह के बड़ी रकम जमा हुई थी। यह मामला पश्चिम बंगाल पुलिस की एक FIR पर आधारित है जो सिलीगुड़ी से चल रहे ऑनलाइन सट्टेबाजी सिंडिकेट से जुड़ा है।
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लग्जरी लाइफस्टाइल: गाड़ियों का शौक और दुबई कनेक्शन
Anurag Dwivedi की जीवनशैली उनकी तेजी से बढ़ती कमाई का प्रतीक बन गई थी। गाड़ियों के शौकीन अनुराग के पास कई लग्जरी वाहनों का कलेक्शन था। उन्होंने एक पॉडकास्ट में दावा किया था कि उनकी लैंबॉर्गिनी उरुस को उन्होंने 288 किमी/घंटा की रफ्तार से दौड़ाया है।
दुबई से उनके गहरे संबंध थे। नवंबर 2025 में दुबई में शादी के अलावा, अफवाहें थीं कि उन्होंने वहाँ प्रॉपर्टी खरीदी है और हवाला के जरिए पैसा भेजा है। कुछ सूत्रों ने दुबई नागरिकता की भी बात कही, हालाँकि इसकी पुष्टि नहीं हुई।
अपने एक पॉडकास्ट में अनुराग ने दावा किया था कि उनकी नेट वर्थ करीब 190 करोड़ रुपये हो सकती है। उन्होंने यह भी बताया था कि वे 2016 से फैंटेसी क्रिकेट में इन्वेस्ट कर रहे हैं।
वर्तमान स्थिति
22 दिसंबर 2025 तक की स्थिति के अनुसार, अनुराग द्विवेदी दुबई में हैं और ED के समन का जवाब नहीं दे रहे। ED उन्हें भारत लाने की कोशिश कर रही है।
19 दिसंबर को अनुराग ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा: “अरे भाई, जितनी जानकारी मुझे खुद अपने बारे में नहीं है, उतनी तो मीडिया को सिर्फ दो दिन में ही हो गई है… कोई कुछ भी लिख रहा है, किसी का भी नाम जोड़ रहा है, कोई भी रकम बता रहा है-बिना सिर-पैर की बातें।”
उन्नाव के उनके गाँव में ED की कार्रवाई के बाद से सन्नाटा पसरा हुआ है। अनुराग का आलीशान घर, जो गाँव में चर्चा का विषय रहता था, अब बंद पड़ा है। परिवार के सदस्य खुद को घर के अंदर कैद किए हुए हैं और किसी से बातचीत करने से बच रहे हैं।
कानूनी शिकंजा
ED की जांच अभी जारी है, और मामला कई मोड़ ले सकता है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, अनुराग पर मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत मुकदमा चलाया जा सकता है। अगर आरोप साबित होते हैं, तो उन्हें कड़ी सजा का सामना करना पड़ सकता है।
इस मामले ने फैंटेसी क्रिकेट और ऑनलाइन बेटिंग के बीच की धुंधली लकीर पर भी सवाल उठाए हैं। जहाँ एक तरफ फैंटेसी क्रिकेट को कानूनी माना जाता है, वहीं ऑनलाइन बेटिंग कई राज्यों में अवैध है। अनुराग का मामला इसी ग्रे एरिया में फंसा हुआ प्रतीत होता है।
युवाओं के लिए सबक
अनुराग द्विवेदी की कहानी आज के दौर के महत्वाकांक्षी युवाओं के लिए एक सबक भी है। ओवरनाइट सफलता और त्वरित धन का आकर्षण कई बार कानूनी सीमाओं को धुंधला कर देता है। सोशल मीडिया पर प्रभाव बनाने और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से धन कमाने के नए रास्तों में कानूनी सीमाओं का ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक है।
अनुराग की कहानी में एक विरोधाभास साफ दिखता है: एक तरफ वे लाखों युवाओं के प्रेरणास्रोत हैं जो डिजिटल माध्यमों से सफलता पाना चाहते हैं, तो दूसरी तरफ उन पर लगे आरोप समाज के लिए चिंता का विषय हैं।
निष्कर्ष
अनुराग द्विवेदी की कहानी फर्श से अर्श तक पहुँचने और फिर विवादों में घिरने की आधुनिक दास्तान है। एक साधारण गाँव का युवा जिसने अपने क्रिकेट जुनून और डिजिटल समझ के दम पर करोड़ों का साम्राज्य खड़ा किया, आज कानूनी उलझनों में फंसा हुआ है।
उनकी सफलता और विवाद दोनों ही सोशल मीडिया के युग की उपज हैं। जहाँ एक ओर यूट्यूब और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म ने उन्हें रातों-रात स्टार बना दिया, वहीं इन्हीं माध्यमों के जरिए उनकी विलासितापूर्ण जीवनशैली ने जांच एजेंसियों का ध्यान खींचा।
अंततः, अनुराग द्विवेदी का मामला सिर्फ एक व्यक्ति की कहानी नहीं, बल्कि डिजिटल इंडिया के उस पहलू की कहानी है जहाँ सफलता और विवाद के बीच की रेखा अक्सर धुंधली हो जाती है। आने वाले दिनों में ED की जांच और कानूनी प्रक्रिया ही तय करेगी कि अनुराग की यह कहानी किस मोड़ पर जाकर थमती है।


