Republic Today, Bhangoriya Festival 2026:-मध्य प्रदेश के आदिवासी बहुल क्षेत्रों में वसंत और होली के स्वागत का प्रतीक Bhangoriya Festival 2026 आज धूमधाम से शुरू हो गया। झाबुआ, आलीराजपुर, बड़वानी, धार और खंडवा जिलों के बाजारों और चौराहों पर मंगलवार से ढोल-मांदल की गूंज सुनाई देने लगी है। यह उत्सव 2 मार्च तक चलेगा, जिसमें युवा और बुजुर्ग सभी पारंपरिक उल्लास के साथ शामिल होंगे।
- 25 फरवरी को यहां लगेंगे प्रमुख भगोरिया हाट
- Bhangoriya Festival 2026: सिर्फ त्योहार नहीं, एक सांस्कृतिक धरोहर
- तैयारियां चरम पर: कलेक्टर ने किया निरीक्षण, वालंटियर्स तैनात
- मेले में बिछड़े बच्चे को पुलिस ने परिजनों से मिलाया
- क्या है भगोरिया उत्सव का महत्व?
- पर्यटकों पर भी मेहरबान है भगोरिया
- इन जिलों में भी है धूम
- सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
- 2 मार्च तक जारी रहेगा उत्सव का दौर
25 फरवरी को यहां लगेंगे प्रमुख भगोरिया हाट
उत्सव के पहले दिन मंगलवार को पिटोल, खरडूबड़ी, थांदला, तारखेडी, बरवेट और अंधरवाड में भगोरिया मेले आयोजित हुए। बुधवार, 25 फरवरी को यह उत्सव अपने दूसरे दिन प्रवेश कर चुका है। आज झाबुआ जिले में उमरकोट, माछलिया, करवड़, बोडायता, कल्याणपुरा, मदरानी और ढेकल सहित कई गांवों में भगोरिया हाट बाजार सजेंगे। प्रशासन के अनुसार, पूरे झाबुआ जिले में कुल 35 स्थानों पर भगोरिया मेलों का आयोजन किया गया है।
Bhangoriya Festival 2026: सिर्फ त्योहार नहीं, एक सांस्कृतिक धरोहर
भगोरिया उत्सव भील और भिलाला आदिवासी समुदाय का सबसे बड़ा सांस्कृतिक पर्व है। इसे होलिकोत्सव का ही एक रूप माना जाता है। इस दौरान युवक-युवतियां पारंपरिक वेशभूषा में सज-धज कर हाट बाजारों में पहुंचते हैं। यह उत्सव प्रेम-प्रसंग और वैवाहिक संबंधों के लिए भी खासा महत्व रखता है। परंपरा के अनुसार, इस दौरान युवक-युवतियां अपने मनपसंद जीवनसाथी का चुनाव करते हैं और कई जोड़े ‘भगोरिया’ यानी सहमति से भागकर या परिवार की सहमति से विवाह भी रचाते हैं। यही कारण है कि इसे आदिवासियों का सबसे रंगीन प्रेम उत्सव भी कहा जाता है।
तैयारियां चरम पर: कलेक्टर ने किया निरीक्षण, वालंटियर्स तैनात
भीड़ और सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन ने कमर कस ली है। Bhangoriya Festival 2026 के मद्देनजर झाबुआ कलेक्टर नेहा मीना ने जिला मुख्यालय पर सिविल डिफेंस वॉलंटियर्स को जैकेट भेंट कर उनका हौसला बढ़ाया। इस दौरान उन्होंने कहा कि भगोरिया हाट का सुव्यवस्थित प्रबंधन सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
प्रशासन ने झाबुआ जिले की सभी तहसीलों में 120 नए सिविल डिफेंस वॉलंटियर्स का चयन किया है। ये वालंटियर्स भगोरिया हाट बाजार और होली पर्व के दौरान:
- भीड़ प्रबंधन और यातायात व्यवस्था संभालेंगे।
- आपात स्थिति में प्राथमिक सहायता (प्राथमिक उपचार) प्रदान करेंगे।
- लापता बच्चों और व्यक्तियों को उनके परिजनों से मिलाने में मदद करेंगे।
- प्रशासनिक अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित करेंगे।
कलेक्टर मीना ने बताया कि ये वालंटियर्स किसी भी प्राकृतिक संकट या आपातकालीन स्थिति में राहत और बचाव कार्यों में भी अहम भूमिका निभाएंगे।
मेले में बिछड़े बच्चे को पुलिस ने परिजनों से मिलाया
प्रशासनिक तैयारियों का ही नतीजा रहा कि मंगलवार को अंधारवड़ के भगोरिया मेले में एक चार वर्षीय बालक अपने परिजनों से बिछड़ गया। मेले में लगी पुलिस टीम ने तत्परता दिखाते हुए बच्चे को ढूंढ निकाला और सुरक्षित उसके परिवार वालों को सौंप दिया। बच्चे के चेहरे की मुस्कान और परिजनों की आंखों में आंसू देखकर वहां मौजूद सभी लोगों ने राहत की सांस ली।
क्या है भगोरिया उत्सव का महत्व?
- प्रेम और विवाह का प्रतीक: भगोरिया में युवक-युवतियां एक-दूसरे को पसंद करते हैं। अगर वे शादी करना चाहते हैं, तो वे ‘भगोरिया’ निकाल सकते हैं, जो आदिवासी समाज में सामाजिक रूप से स्वीकार्य है।
- होली की शुरुआत: ऐसी मान्यता है कि भगोरिया के बाद ही होली के रंग चढ़ते हैं। यह उत्सव फसल पकने और बसंत ऋतु के आगमन की खुशी का भी प्रतीक है।
- आदिवासी एकता का केंद्र: दूर-दराज के गांवों से लोग यहां इकट्ठा होते हैं। यह उनके लिए सामाजिक मेलजोल बढ़ाने का सबसे बड़ा मंच होता है।
पर्यटकों पर भी मेहरबान है भगोरिया
इन दिनों झाबुआ और आसपास के जिलों में देश-विदेश से पर्यटक भी बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। आदिवासी नृत्य, पारंपरिक वेशभूषा और हस्तशिल्प के सामान पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। स्थानीय हाट बाजारों में लकड़ी की कलाकृतियां, मिट्टी के बर्तन, पारंपरिक गहने और आदिवासी पेंटिंग की खूब बिक्री हो रही है।
इन जिलों में भी है धूम
हालांकि झाबुआ को इस उत्सव का मुख्य केंद्र माना जाता है, लेकिन Bhangoriya Festival 2026 का उल्लास पूरे निमाड़ और झाबुआ-अलीराजपुर संभाग में देखा जा रहा है। धार जिले के कुक्षी, बड़वानी के राजपुर, खंडवा के हरसूद और आलीराजपुर के जोबट सहित दर्जनों बड़े बाजारों में मेले लग रहे हैं।
स्थानीय कलाकार मोहन डामोर ने Republic Today से बातचीत में कहा, “हमारे पूर्वजों ने हमें यह उत्सव दिया है। आज के युवा भी इसे उतने ही उत्साह से मना रहे हैं। यह हमारी पहचान है। ढोल की थाप पर थिरकना हमारे खून में है, और भगोरिया में यह और गहरा हो जाता है।”
सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
पुलिस अधीक्षक कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, सभी संवेदनशील भगोरिया स्थलों पर पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया है। अतिरिक्त पुलिस बल, महिला सुरक्षा दल और यातायात पुलिस के जवान व्यवस्था संभाल रहे हैं। अस्थाई पुलिस चौकियां बनाई गई हैं और एंबुलेंस सेवा भी 24×7 उपलब्ध रहेगी।
2 मार्च तक जारी रहेगा उत्सव का दौर
भगोरिया उत्सव अब लगातार 2 मार्च तक चलेगा। इस दौरान अलग-अलद गांवों में अलग-अलग तारीखों पर मेले लगेंगे। प्रशासन ने लोगों से शांतिपूर्ण माहौल में त्योहार मनाने की अपील की है। आदिवासी अंचल में यह उत्सव जितना धार्मिक है, उतना ही सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।
Republic Today आपको Bhangoriya Festival 2026 की हार्दिक शुभकामनाएं देता है। अगर आप भी इस उत्सव का हिस्सा बनना चाहते हैं, तो झाबुआ या आसपास के जिलों का रुख कर सकते हैं और इस अनूठी आदिवासी संस्कृति को करीब से देख सकते हैं।


