कटनी, मध्य प्रदेश। – मध्य प्रदेश के कटनी जिले में एक बड़े कोयला भंडार की खोज ने क्षेत्र को एक नई आर्थिक संभावना की ओर धकेल दिया है। जानकारी के अनुसार, बड़वारा तहसील के लोहरवारा गांव के समीप उमड़ार नदी के कटाव क्षेत्र में रेत खनन के दौरान उच्च गुणवत्ता वाले कोयले की मौजूदगी के संकेत मिले। इसकी पुष्टि शनिवार, 18 जनवरी को भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) और राज्य खनिज विभाग की एक संयुक्त टीम द्वारा किए गए सर्वेक्षण में हुई है। इस खोज से जिले की खनिज समृद्धि में एक नया अध्याय जुड़ने की उम्मीद जगी है।
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रेत खदान से निकला ‘काला सोना’
पूरी घटना की शुरुआत पिछले कुछ दिनों में हुई, जब उमड़ार नदी किनारे एक रेत खदान से खनन कार्य कर रहे मजदूरों को जमीन के अंदर से एक कठोर, काले रंग का पदार्थ दिखाई दिया। स्थानीय ग्रामीणों ने जब इसकी जानकारी पाई, तो इसे कोयला मानते हुए इसे निकालना और एकत्र करना शुरू कर दिया। इसकी सूचना जब प्रशासन और खनिज विभाग को मिली, तो तत्काल जीएसआई की टीम को मौके पर भेजा गया।
जीएसआई, जबलपुर के क्षेत्रीय प्रमुख संजय धोपेश्वर के नेतृत्व में पहुंची टीम में सहायक भौमिकीविद अनिल चौधरी, उप संचालक खनिज डॉ. रत्नेश दीक्षित और सहायक खजिन अधिकारी पवन कुशवाहा शामिल थे। टीम ने ढाई घंटे तक क्षेत्र का गहन सर्वेक्षण किया और विभिन्न स्थानों से कोयले के नमूने एकत्र किए।
‘कोल सीन’ मिलने की पुष्टि, गुणवत्ता शानदार
सर्वेक्षण के प्रारंभिक निष्कर्ष उत्साहवर्धक हैं। उप संचालक खनिज, डॉ. रत्नेश दीक्षित के अनुसार, “सर्वे में कोल सीन (कोयला की परत) पाया गया है। नदी के कटाव के कारण यह परत बाहर आई हुई दिख रही है। प्रथम दृष्टया कोयला खनिज मिलना और विस्तारण की उपलब्धता क्षेत्र में पाई गई है।” जीएसआई अधिकारियों ने इसे ए-ग्रेड का बिटूमिनस थर्मल कोयला बताया है, जो ऊर्जा उत्पादन के लिए उच्च गुणवत्ता वाला माना जाता है।
क्षेत्र में कोयले की परत लगभग आधा मीटर से दो फीट मोटी दिखाई दे रही है। यह क्षेत्र उमरिया जिले के बरही क्षेत्र से सटा हुआ है, जहां पहले से कोयला मौजूद होने की संभावना जताई जाती रही है। हालांकि, भंडार की वास्तविक सीमा, गहराई और आर्थिक दृष्टि से खनन की व्यवहार्यता का पता लगाने के लिए विस्तृत ड्रिलिंग और परीक्षण की आवश्यकता होगी। टीम द्वारा एकत्र नमूनों का विश्लेषण जीएसआई प्रयोगशाला में किया जाएगा, जिसके बाद ही कोयले के ग्रेड का सटीक निर्धारण हो सकेगा।
अवैध उत्खनन पर प्रशासन सतर्क
खोज की खबर फैलते ही क्षेत्र में अवैध उत्खनन की घटनाएं भी सामने आईं, जब कुछ ग्रामीणों ने बोरियों और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में कोयला ले जाना शुरू कर दिया। इस पर प्रशासन और खनिज विभाग तत्काल सतर्क मोड में आ गया है। क्षेत्र में अनधिकृत गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है ताकि राज्य के इस संभावित संसाधन की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
यदि विस्तृत सर्वेक्षण के बाद यहां बड़ी कोयला खदान विकसित होती है, तो इसके दूरगामी आर्थिक लाभ होंगे। इससे न केवल राज्य को भारी राजस्व प्राप्त होगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। यह खोज मध्य प्रदेश सरकार के हाल ही में आयोजित माइनिंग कॉन्क्लेव के बाद आई है, जिसमें राज्य में खनन क्षेत्र में हजारों करोड़ रुपये के निवेश के समझौते हुए थे। इसी तरह के आर्थिक विकास के अवसरों के बारे में लाडली बहना योजना और पीएम आवास योजना जैसी अन्य योजनाओं की जानकारी आप हमारे सरकारी योजना सेक्शन में प्राप्त कर सकते हैं।
खनिजों का गढ़ है कटनी
कटनी जिला लंबे समय से खनिज संपदा के लिए प्रसिद्ध रहा है। इससे पहले भी यहां चूना पत्थर, डोलोमाइट और बॉक्साइट जैसे खनिजों के बड़े भंडार हैं। हाल के वर्षों में सोने और क्रिटिकल मिनरल्स (महत्वपूर्ण खनिज) की संभावनाओं के संकेत भी मिले थे। उमड़ार नदी क्षेत्र में कोयले की मौजूदगी के संकेत इसी श्रृंखला में एक नया पड़ाव हैं। अब डायरेक्टरेट ऑफ जियोलॉजी एंड माइनिंग द्वारा किए जाने वाले विस्तृत सर्वेक्षण से ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि यह भंडार कितना बड़ा है और इसका व्यावसायिक दोहन कितना लाभप्रद होगा।
क्या करेगी मध्यप्रदेश सरकार
अब मामले की आधिकारिक रिपोर्ट मध्य प्रदेश शासन को भेजी जाएगी। शासन के निर्देशानुसार ही भंडार के विस्तृत पूर्वेक्षण और आर्थिक व्यवहार्यता अध्ययन का कार्य शुरू होगा। यह प्रक्रिया कई चरणों में पूरी होगी, जिसमें भूवैज्ञानिक मानचित्रण, कोर ड्रिलिंग, संसाधन आकलन और पर्यावरणीय प्रभाव अध्ययन शामिल हैं। इस संभावित संसाधन के संरक्षण और भविष्य के व्यवस्थित दोहन के लिए प्रशासन द्वारा क्षेत्र में सुरक्षा एवं निगरानी के कदम भी मजबूत किए जा रहे हैं।


